Friday, July 24, 2026
Latest:

News War Live

National News Portal

उत्तराखंड

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस कविता से किया अपना भाषण खत्‍म, जानिए क्‍या बोले

देहरादून के परेड ग्राउंड में पीएम मोदी के संबोधन में जादू देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने जहां अपने भाषण की शुरुआत गढ़वाली बोली से की, वहीं अंत कविता की कुछ पंक्तियों से किया। उन्‍होंने कहा कि मैं देवभूमि में आया हूं, वीरमाताओं की भूमि में आया हूं, तो कुछ भाव पुष्‍प, कुछ श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। कहा कि कुछ पंक्‍ति‍यों के साथ अपनी बात समाप्‍त करता हूं….

जहां पवन बहे संकल्प लिए,

जहां पर्वत गर्व सिखाते हैं,

जहां ऊंचे नीचे सब रस्ते

बस भक्ति के सुर में गाते हैं

उस देवभूमि के ध्यान से ही

उस देवभूमि के ध्यान से ही

मैं सदा धन्य हो जाता हूं

है भाग्य मेरा, सौभाग्य मेरा,

मैं तुमको शीश नवाता हूं, मैं तुमको शीश नवाता हूं

और धन्‍य-धन्‍य हो जाता हूं।

तूम आंचल हो भारत मां का,

जीवन की धूप में छांव हो तूम,

बस छूने से ही तर जाए,

सबसे पवित्र, वो धरा हो तूम

बस लिए समर्पण तन-मन से

बस लिए समर्पण तन-मन से

मैं देवभूमि में आता हूं,

मैं देवभूमि में आता हूं

हे भाग्‍य मेरा, सौभाग्‍य मेरा

मैं तूमको शीश नवाता हूं।

मैं तूमको शीश नवाता हूं।

और धन्‍य-धन्‍य हो जाता हूं

जहां अंजुली में गंगा जल हो

जहां हर एक मन बस निश्छल हो

जहां गांव-गांव में देश भक्त

जहां नारी में सच्चा बल हो

उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए

मैं चलता जाता हूँ।

उस देवभूमि का आशीर्वाद

मैं चलता जाता हूं,

है भाग्य मेरा, सौभाग्य मेरा

मैं तुमको शीश नवाता हूं।

मंडवे की रोटी

हुड़के की थाप

हर एक मन करता

शिवजी का जाप

ऋषि मुनियों की है

ये तपो भूमि

कितने वीरों की ये जन्मभूमि

मैं देवभूमि आता हूं

मैं तुमको शीश नवाता हूं

और धन्य धन्य हो जाता हूं

मैंन तूमको शीश नवाता हूं

और धन्य धन्य हो जाता हूं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *